आज ये मन उदास हैं.............,
वो सुर्ख लबों की लाली,
जैसे खिलतें गुलाब की कली,
उसी लाली को याद करके,
आज ये मन उदास हैं...............
उसकी होठो की वो मुस्कुराहट,
जैसी हल्की बरसात की आहट,
उसी आहट को याद करके,
आज ये.....................हैं
हमने कभी देखा था समां को,
मेरे लिए जलतें हुयें,
कभी सोचा था उनको उनकी राह चलतें हुए,
उसी राह को आज याद करके,
आज ये मन................हैं
एक मन को मन से जुदा करके,
चल दिए वो ख़ुद को हमसे खफा करके,
उसी गम-ऐ-जुदाई में ख़ुद को जला के,
आज ये मन उदास हैं
4 comments:
narayan narayan
हिंदी भाषा को इन्टरनेट जगत मे लोकप्रिय करने के लिए आपका साधुवाद |
aap dono ka hardik dhanywaad
बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्लाग जगत में स्वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।
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