Monday, June 29, 2009

आज ये मन उदास हैं............भाग-२

आज ये मन उदास हैं.............,
वो सुर्ख लबों की लाली,
जैसे खिलतें गुलाब की कली,
उसी लाली को याद करके,
आज ये मन उदास हैं...............
उसकी होठो की वो मुस्कुराहट,
जैसी हल्की बरसात की आहट,
उसी आहट को याद करके,
आज ये.....................हैं
हमने कभी देखा था समां को,
मेरे लिए जलतें हुयें,
कभी सोचा था उनको उनकी राह चलतें हुए,
उसी राह को आज याद करके,
आज ये मन................हैं
एक मन को मन से जुदा करके,
चल दिए वो ख़ुद को हमसे खफा करके,
उसी गम-ऐ-जुदाई में ख़ुद को जला के,
आज ये मन उदास हैं

4 comments:

नारदमुनि said...

narayan narayan

राजेंद्र माहेश्वरी said...

हिंदी भाषा को इन्टरनेट जगत मे लोकप्रिय करने के लिए आपका साधुवाद |

DigguDG said...

aap dono ka hardik dhanywaad

संगीता पुरी said...

बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।