"भूल गया हैं हर कोई खुदा को,
खाए हैं कसम तेरा ,
हर शक्स हैं दीवाना तेरा इस शहर में,
जब से देखा हैं चेहरा तेरा "
"चहल पहल सी रहती हैं तेरी गली में,
खोये रहतें हैं इसी पहेली में,
क्यों अब ना शुबह होती हैं ना रात,
तेरे आने के बाद इस गली में "
"लौट आतें मौत की गलियों से भी हम,
गर कोई पुकारने हमे उन गलियों को जाता "
"ख्वाब क्या हर तस्वीर में नज़र आतें हम,
गर कोई हमें भूले से याद कर जाता "
"पतझड़ क्या रेगिस्तान में भी नज़र आता बसंत,
गर कोई मेरी आँखों में झाकने की जुर्रत कर जाता "