Saturday, December 10, 2011

meri kwaise aur tu

ख्वाहिसे मर  गयी फिर भी ख्वाब  देखने के अरमान जिंदा हैं, न ख़ुशी हैं न कोई गम  हैं, न धरकण    हैं न आंखें न नम  हैं, फिर भी हम जिंदा हैं, हमारा क्या, तू अपनी उफ्फां में मचलती एक नदी हैं, और हम महज़ एक किनारा हैं, हमे अब क्या कोई और तोरेगा या समेटेगा, हम तो खुद तेरी धरा में बहके खुद को खोने के लिए जिंदा हैं, तुझे पाने के लिए जिंदा हैं.

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